नवरात्रि का विज्ञान (भाग 6): कात्यायनी, आज्ञा चक्र और अंतर्ज्ञान व निर्णय क्षमता (Science of Intuition) का विज्ञान
कल पांचवें भाग में हमने समझा कि कैसे माता स्कंदमाता और विशुद्धि चक्र हमारी अभिव्यक्ति को शुद्ध कर हमारी वाणी (Vāk) को प्रभावी बनाते हैं। जब हमारी अभिव्यक्ति और संवाद स्पष्ट हो जाते हैं, तब चेतना भौतिक इंद्रियों के बंधनों को पार कर दोनों भौहों के मध्य में प्रवेश करती है। आज नवरात्रि का छठा दिन है, जो माता कात्यायनी को समर्पित है। महर्षि कात्यायन की कठिन तपस्या से प्रसन्न होकर उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लेने के कारण इनका नाम 'कात्यायनी' पड़ा। वे चार भुजाओं वाली, सिंह पर सवार, एक हाथ में चमकती हुई तलवार और दूसरे में कमल का फूल धारण किए हुए हैं। वे महिषासुर का वध करने वाली परम योद्धा हैं। प्रतीकात्मक रूप से, माता कात्यायनी आंतरिक अंधकार, भ्रम और दुविधाओं का नाश करने वाली शक्ति हैं। आइए, इस दिव्य योद्धा रूप के पीछे छिपे न्यूरोसाइंस और निर्णय क्षमता के विज्ञान (Science of Decision Making) को 'The Sovereign Vāk' पर गहराई से समझते हैं। आज्ञा चक्र: अंतर्दृष्टि और बुद्धि का सर्वोच्च केंद्र मानव शरीर विज्ञान के अनुसार, माता कात्यायनी का सीधा संबंध हमारे आज्ञा चक्र (Third Eye...