तंत्र-मंत्र और यंत्र-3 | यंत्र: अंधविश्वास का लॉकेट या ब्रह्मांडीय एंटीना?
भ्रम #3: यंत्र सिर्फ घर की दीवारों पर टांगने, जेब में रखने या गले में पहनने की शोपीस वस्तुएं हैं।
सच्चाई: बाज़ार में मिलने वाले ताबीजों और बिना समझे खरीदे गए लॉकेट्स ने यंत्रों को महज़ एक टोटका बनाकर रख दिया है। लेकिन असलियत में, यंत्र प्राचीन ऋषियों द्वारा खोजी गई पवित्र ज्यामिति (Sacred Geometry) का शिखर हैं।
अगर तंत्र 'सॉफ्टवेयर' है और मंत्र 'ध्वनि तरंगें', तो यंत्र उस सिस्टम का 'हार्डवेयर' या 'कॉस्मिक एंटीना' है।
इसे एक वैज्ञानिक उदाहरण से समझें:
आपके घर का टेलीविज़न या रेडियो हवा में तैर रही तरंगों को तब तक कैच नहीं कर सकता, जब तक कि उसके पास एक सही शेप और फ्रीक्वेंसी वाला 'एंटीना' या 'सैमसंग/सोनी का रिसीवर' न हो। यंत्र ठीक इसी तरह काम करते हैं। यंत्रों में बनी रेखाएं, त्रिकोण, वृत्त और बिंदु बेहद सटीक गणितीय गणनाओं (Mathematical Calculations) पर आधारित होते हैं।
जब इन आकृतियों को किसी विशिष्ट धातु (जैसे तांबा, चांदी या सोना) पर उकेरा जाता है और मंत्रों से ऊर्जान्वित (Consecrate) किया जाता है, तो ये अपने आसपास के वातावरण से कॉस्मिक एनर्जी को खींचकर एक शक्तिशाली ऊर्जा क्षेत्र (Energy Field) बना देती हैं। उदाहरण के लिए, 'श्री यंत्र' की बनावट को आज के वैज्ञानिक भी ब्रह्मांडीय ज्यामिति का सबसे जटिल और अचूक मॉडल मानते हैं। यंत्र अंधविश्वास की वस्तु नहीं, बल्कि ऊर्जा को केंद्रित करने वाले पावर ग्रिड हैं।
— Ritesh Choubey
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