तंत्र-मंत्र और यंत्र-1 | तंत्र-मंत्र का काला सच या छुपा हुआ विज्ञान? 5 बड़े भ्रम और उनकी सच्चाई।

जब भी आप 'तंत्र-मंत्र और यंत्र' शब्द सुनते हैं, तो आपके दिमाग में सबसे पहले क्या आता है?


शायद कोई अंधेरा कमरा, जलती हुई खोपड़ी, लाल कपड़े पहने कोई डरावना व्यक्ति या फिल्मों में दिखाया जाने वाला कोई खतरनाक सीन? दुर्भाग्य से, हमारी फिल्मों, कहानियों और कुछ ढोंगी लोगों ने भारत के इस सबसे महान और प्राचीन विज्ञान की छवि को पूरी तरह से विकृत (Distort) कर दिया है।


लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि जिस देश ने शून्य (Zero) दिया, आयुर्वेद दिया, योग और प्राणायाम जैसी वैज्ञानिक पद्धतियां दीं, क्या उस देश के ऋषि-मुनि बिना किसी लॉजिक के केवल अंधविश्वास को बढ़ावा देंगे?


बिलकुल नहीं! सच तो यह है कि तंत्र, मंत्र और यंत्र कोई जादू-टोना नहीं, बल्कि एक उच्च स्तरीय आभ्यांतरिक विज्ञान (Esoteric Science), ध्वनि का गणित और पवित्र ज्यामिति (Sacred Geometry) है, जिसे आज का आधुनिक विज्ञान भी धीरे-धीरे स्वीकार कर रहा है।


आइए, आज के इस लेख में हम तंत्र-मंत्र की रहस्यमयी दुनिया के पीछे छिपे असली विज्ञान को समझते हैं और इससे जुड़े 5 सबसे बड़े भ्रमों का पर्दाफाश करते हैं।


“श्री यंत्र: ब्रह्मांडीय ऊर्जा के प्रवाह को नियंत्रित करने वाला पवित्र ज्यामिति (Sacred Geometry) का एक अचूक गणितीय और वैज्ञानिक ढांचा।”

भ्रम #1: तंत्र-मंत्र का मतलब केवल 'काला जादू' या किसी का बुरा करना है


सच्चाई: यह इस विज्ञान से जुड़ा सबसे बड़ा और सबसे आम भ्रम है। असल में, 'तंत्र' का काला जादू से कोई लेना-देना नहीं है।


संस्कृत में तंत्र का अर्थ होता है— 'तनोति त्रायति इति तन्त्रम्'। इसका सीधा सा मतलब है— वह व्यवस्था, तकनीक या प्रणाली जो हमारी चेतना (Consciousness) और ऊर्जा का विस्तार करे। तंत्र कोई अंधविश्वास नहीं, बल्कि स्वयं के भीतर छिपी शक्तियों को जगाने और आत्म-रूपांतरण (Self-Transformation) का एक विशुद्ध व्यावहारिक मार्ग है।


इसे एक वैज्ञानिक उदाहरण से समझें:

बिजली (Electricity) एक ऊर्जा है। उस बिजली का उपयोग करके आप अपने घर में बल्ब जलाकर उजाला भी कर सकते हैं, और अगर कोई चाहे तो उसी बिजली का गलत इस्तेमाल करके किसी को करंट भी लगा सकता है। अब आप ही बताइए, खराबी बिजली में है या उसका गलत इस्तेमाल करने वाले इंसान की नीयत में?


ठीक इसी तरह, तंत्र भी ब्रह्मांड की असीम ऊर्जा को नियंत्रित करने की एक तकनीक (Technology) है। प्राचीन काल में इसका उपयोग केवल आत्मज्ञान, मानसिक शांति और चक्रों को जागृत करने के लिए किया जाता था। लेकिन समय के साथ, कुछ स्वार्थी तत्वों ने अपनी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं के लिए इसका गलत इस्तेमाल करना शुरू कर दिया, जिसे समाज में 'काला जादू' या 'अभिचार कर्म' कहा जाने लगा।


मूल रूप से, तंत्र एक अत्यंत पवित्र और वैज्ञानिक पद्धति है, जिसका एकमात्र उद्देश्य मनुष्य को उसकी शारीरिक सीमाओं से ऊपर उठाकर परम चेतना से जोड़ना है।


— Ritesh Chaubey

                                              Founder & Chief Editor, 

                                          The Sovereign Vāk Journal





Comments

Popular posts from this blog

गुदड़ी के लाल: बिन्देश्वरी दूबे — खदानों के अंधेरे से शासन के शीर्ष तक — एक मजदूर मसीहा का उदय (भाग 1, 2, 3, 4)

गुदड़ी के लाल: बिन्देश्वरी दूबे — सचिवालय का आठवां योद्धा और बेरमो की नियति (भाग 5)

नवरात्रि का विज्ञान (भाग 7): कालरात्रि, सहस्रार की ओर कदम और भय की न्यूरो-बायोलॉजी पर विजय