नाम और स्वरूप का नया क्षितिज: 'चक्र बुद्धि' और 'The Sovereign Vāk' से 'Rajyog' तक की यात्रा

 

प्रिय पाठकों,
परिवर्तन सृष्टि का नियम है, और जब यह परिवर्तन किसी विचार, दृष्टि या चेतना के धरातल पर होता है, तो वह एक नए स्वरूप को जन्म देता है। 'The Sovereign Vāk' के इस मंच पर आज हम एक नए मील के पत्थर पर खड़े हैं।
इस वैचारिक मंच की शुरुआत सबसे पहले 'चक्र बुद्धि' के रूप में हुई थी, जहां हमारा उद्देश्य मानवीय बुद्धि और विवेक के विभिन्न चक्रों को समझना था। समय के साथ, जब विचारों को एक स्वतंत्र अभिव्यक्ति और संप्रभु आवाज देने की आवश्यकता महसूस हुई, तब इस मंच ने 'The Sovereign Vāk' का रूप लिया। इस दौरान हमने समसामयिक, दार्शनिक और नीतिगत विषयों का निष्पक्ष विश्लेषण करने का प्रयास किया।
आज, विचारों के इसी क्रमिक विकास (Evolution) के अगले और अधिक परिपक्व चरण में, हम अपने इस मंच को एक नया नाम और नई पहचान दे रहे हैं—Rajyog (राजयोग)।
'Rajyog' ही क्यों?
राजयोग केवल एक शब्द नहीं, बल्कि सर्वोच्च चेतना, अनुशासन और स्वयं पर संप्रभुता (Self-Sovereignty) का शिखर है। जब एक स्वतंत्र चेतना संसार के भौतिक, राजनैतिक और सामाजिक सच का अवलोकन आंतरिक शांति और परम विवेक के साथ करती है, तो वही बौद्धिक 'राजयोग' है। हमारा नया डोमेन rajyogjournal.com इसी दृष्टिकोण को समर्पित है।
आगे का सफर:
मंच का नाम और डोमेन भले ही बदल गया हो, लेकिन हमारा मूल सिद्धांत—'सत्यम शिवम् सुंदरम' और निष्पक्ष, गंभीर वैचारिक विश्लेषण का संकल्प—पहले से भी अधिक सुदृढ़ रहेगा। हम आगे भी चेतना (Consciousness), संस्कृति, भू-राजनीति (Geopolitics) और समसामयिक विषयों पर इसी गहराई के साथ अपनी बात रखते रहेंगे।
इस वैचारिक यात्रा में निरंतर साथ बने रहने के लिए आप सभी पाठकों का सहृदय आभार।
सत्य की खोज और स्वतंत्र चेतना के इस नए अध्याय 'Rajyog' में आपका स्वागत है।
भवदीय,
रितेश चौबे
एडमिन, Rajyog (rajyogjournal.com)

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