नवरात्रि का विज्ञान (भाग 8): महागौरी, सहस्रार चक्र और परम शुद्धि व मानसिक शांति का विज्ञान
कल सातवें भाग में हमने समझा कि कैसे माता कालरात्रि की ऊर्जा हमारे अचेतन मन (Subconscious Mind) के अंधेरे और भय केंद्र (Amygdala) को शांत कर हमें अभय बनाती है। जब भय और कुंठाओं का वह गहरा अंधकार पूरी तरह छँट जाता है, तब चेतना अपने अंतिम और सबसे दिव्य शिखर पर पहुँचती है। आज नवरात्रि का आठवां दिन है, जो माता महागौरी को समर्पित है। 'महा' का अर्थ है अत्यंत या सर्वोच्च, और 'गौरी' का अर्थ है श्वेत, देदीप्यमान या पवित्र। कथाओं के अनुसार, जब माता ने कालरात्रि के रूप में कठिन साधना की, तब उनका शरीर काला पड़ गया था। तब भगवान शिव ने उन पर गंगाजल छिड़का, जिससे वे पूर्णतः शुद्ध और अत्यंत गौरवर्ण (चमकदार सफेद) हो गईं। वे वृषभ (बैल) पर सवार हैं, अत्यंत शांत मुद्रा में हैं और श्वेत वस्त्र व आभूषण धारण करती हैं। यह रूप पूर्ण पवित्रता, शांति और आनंद का प्रतीक है। आइए, इस परम शांत रूप के पीछे छिपे न्यूरो-केमिकल विज्ञान (Neuro-chemical Science) को 'The Sovereign Vāk' पर गहराई से समझते हैं। सहस्रार चक्र: सर्वोच्च चेतना और ब्रह्मांडीय जुड़ाव मानव शरीर विज्ञान और योग विज्ञान के अनु...